राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के आलोक में प्राप्त महत्वपूर्ण सुझावों को मध्यप्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में लागू किया जाएगा

शिक्षक-शिक्षा पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी संपन्न

स्कूल शिक्षा (स्वतंत्र प्रभार) और सामान्य प्रशासन राज्य मंत्री श्री इन्दर सिंह परमार ने कहा कि शिक्षक-शिक्षा विषय पर यह राष्ट्रीय संगोष्ठी मध्य प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था का आधार बनेगी। शिक्षक-शिक्षा विषय पर विद्वतजनों द्वारा किए गए मंथन से उपजे सुझावों पर ड्राफ्ट तैयार किया जा रहा है। श्री परमार ने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के आलोक में प्राप्त महत्वपूर्ण सुझावों को मध्यप्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में लागू किया जाएगा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू करने में मध्यप्रदेश देश का अग्रणी राज्य होगा। श्री परमार 21वीं सदी में शिक्षक-शिक्षा का कायाकल्प’ विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के समापन कार्यक्रम में सम्मलित हुए।

संगोष्ठी समापन के मुख्य अतिथि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सह सरकार्यवाह श्री दत्तात्रेय होसबाले ने शिक्षा जगत से जुड़े सभी लोगों से आह्वान किया कि वे भारत को पुनः विश्व गुरु बनाने के लिए आगे आयें। उन्होंने कहा कि आज हमारे पास नीति है, परिवेश भी है। यदि हम संकल्प लेंगे तो आने वाले 15-20 वर्षों में यह संभव है। समाज को साथ लेने के लिए सकारात्मक आन्दोलन करें। श्री होसबाले ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है और इसमें लाखों लोगों ने योगदान दिया है। विश्व भर के लोकतांत्रिक देशों में कही भी ऐसी नीति नहीं है जिसको बनाने में इतनी बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी हो। यह हमारे संविधान की तरह ही इसे जनता ने स्वयं के लिए बनाया है। शिक्षण व्यवसाय या नौकरी नहीं है। यह तपस्या, साधना और मिशन है। यदि शिक्षक को समाज में अलग से महत्व चाहिए तो उसे राष्ट्रधर्म के अनुसार जीना होगा। हमारे समाज में ऐसे हजारों उदाहरण हैं, जिसमें ऐसे शिक्षकों को विद्यार्थी अंतिम साँस तक याद रखते हैं। उन्होंने शिक्षकों से आह्वान करते हुए कहा कि वे शिक्षण संस्थाओं में गुणवत्ता बढ़ाने के लिए प्रयास करें। यह वर्तमान पीढ़ी का दायित्व है कि भारत की शिक्षण प्रणाली एक आदर्श मॉडल के रूप में स्थापित हो और विश्व के अन्य देश इसकी चर्चा करें।

विद्या भारती शिक्षक शिक्षा के मानक बनाने के लिए सुझाव दे- श्री जोशी

 एन.सी.टी.ई. के चेयरमैन श्री विनीत जोशी ने कहा कि उनकी संस्था अब आगे शिक्षण व्यवस्था के मानक को तैयार करने का कार्य करेगी। उन्होंने विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान से इस बारे में सुझाव देने का आग्रह भी किया। उन्होंने बताया कि चार वर्षीय बीएड पाठ्यक्रम तैयार हो चुका है और इसे पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू किया जाएगा। साथ ही यूजीसी ने ‘एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट’ बनाने के लिए रेगुलेशन बना लिया है और इसे भारत सरकार के सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के साथ मिलकर एक प्लेटफार्म पर लाँच करने की तैयारी चल रही है। केन्द्रीय विश्वविद्यालयों के लिए संयुक्त प्रवेश परीक्षा आयोजित किये जाने का प्रस्ताव भी विचाराधीन है, जिसे आने वाले सत्र से शुरू किये जाने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि दो दिवसीय संगोष्ठी की अनुशंसाओं का अध्ययन कराकर उसे लागू करेंगे।

 इस अवसर पर विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान के अध्यक्ष श्री कैलाश चंद्र शर्मा ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति को क्रियान्वित किये जाने को लेकर संस्थान की ओर से दस सदस्यीय स्थायी समिति बनाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि इस राष्ट्रीय संगोष्ठी के साथ 28 अन्य क्षेत्रीय संगोष्ठियों में प्राप्त सुझावों को सभी नियामक संस्थाओं को भेजा जाएगा।

कार्यक्रम का संचालन विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान के मध्यप्रदेश संयोजक डॉ. शशिरंजन अकेला ने और आभार प्रदर्शन विद्या भारती के मध्य भारत के प्रांत प्रमुख डॉ. रामकुमार भावसार ने किया। समापन सत्र में चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ के कुलपति श्री नरेन्द्र कुमार तनेजा, उपाध्यक्ष मंजूश्री सरदेशपांडे के साथ देश के विभिन्न राज्यों से आए विद्वतजन उपस्थित थे। 

स्कूल शिक्षा विभाग मध्यप्रदेश शासन, विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान और राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद के संयुक्त तत्वावधान में यह संगोष्ठी आयोजित की गई थी।

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